खुलने का समय : सोमवार से शनिवार - सुबह 8 से शाम 5 बजे तक
देश के भावी कर्णधार- आज के शिशु एवं युवा, अपनी संस्कृति को पहचानते हुए, उसे अपनाते हुए तथा विश्व बंधुत्व वाली संस्कृति में अपनी आस्था रखते हुए, एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करने में सहायक हो, जो फिर एक बार पुनः भारतवर्ष को विश्व गुरु के पद पर आसीन कर सकें अशिक्षा बेरोजगारी व शारीरिक मानसिक कष्टों का निवारण करने में सक्षम हो। हम भारत की गौरवशाली संतान को भारत के गौरव तथा मर्यादा के अनुसार बनाने का अथक प्रयास कर रहे हैं। जिससे हमारी शिक्षा दीक्षा, कार्यकलाप देश के सम्मान को बढ़ाने वाले हो। हमारे सभी प्रकार के कार्यों का केंद्र बिंदु यह पुण्य भूमि हो, हमारा प्रयास है कि हम ऐसे श्रेष्ठ बालकों का निर्माण कर सकें, जिनके चेहरे पर एक अलौकिक आभा, मस्तक पर तेज, शरीर में बल, मन में प्रचंड इच्छा शक्ति, बुद्धि में पांडित्य, तथा जिनके जीवन में स्वावलंबन, हृदय में प्रेम, इच्छा शक्ति में शिवा, प्रताप, ध्रुव ,प्रह्लाद के जैसा आत्मबल हो। जिनको देखकर लोगों के मन मस्तिष्क में महापुरुषों की स्वता स्मृति जागृत हो उठे। हम प्रतिवर्ष अनेक विवेकानंद, अंबेडकर, पटेल,कलाम जैसे व्यक्तियों को बनाएं, यही वह महत्वाकांक्षा है, जिस को मूर्त रूप देने के लिए ही इस विद्यापीठ की स्थापना हुई है